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रविवार, 19 अगस्त 2012

चुनाव 2014 के मतदाताओं से ...

SwaSaSan Welcomes You...
निवेदन!!! चुनाव-2014 के मतदाताओं से ...
मित्रो;
जैसा कि नाम से स्पष्ट है
"स्वसासन" का उद्देश्य
वास्तविक स्वतंत्रता की प्राप्ति ही है !
वह भी बिना सशस्त्र संघर्ष के
बिना सड़कों पर इकट्ठा होकर नारे लगाए !
हालाँकि  'हम भारतीय'  वास्तविक कम बनावटी अधिक हैं...
ऐसा 2013 में विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों के परिणामों से स्पष्ट हुआ !
अभी कुछ ही दिनों पहले
हममें से अधिकाँश भारतीय (?)
'मैं भी अन्ना', 'मैं भी अरविंद', 'मैं भी आम आदमी' कहते नहीं थक रहे थे !
यानी भारतीय जनमानस
9० से भी अधिक प्रतिशत
बहुमत के साथ
"भ्रष्टाचार" के विरुद्ध था !
इनमें उन राज्यों के नागरिक भी थे
जिनमें 2013 में आम चुनाव हुए थे  !
देख लिया सबने कि
हम भारतीयों की
कथनी और करनी में
कितना बड़ा अंतर है ???
अभी तक का चुनावी इतिहास भी
 यही बताता है कि
साढ़े चार - पौने पांच साल रोते रहने वाला मतदाता
चुनाव आते ही अपने
अपने बाहुबली आकाओं का अंधभक्त हो
उनकी जीत के लिए
कमर कस तत्पर हो जाता है !
भले चुनाव के पहले उसे कभी
उस "बाहुबली नेता " से
कोई काम ना पड़ा हो
भले उस नेता ने
पिछले चुनाव के बाद
और
इस चुनाव के सर पर आने से पहले
या जीवन में कभी भी
उसे कभी कोई महत्व ना दिया हो,
भले उसकी स्थिति
उन बाहुबली की नज़रों में
कुत्ते की सी हो
मगर उसी  मतदाता को
उन बाहुबली के द्वारा
नाम लेकर पुकारने मात्र से
या  व्यक्तिगत रूप से फोन कर
या  घर आकर
या  मोहल्ले की सभा में
"अब सब तुम्हारे ही हाथ में है "
कह देने मात्र से
ऐसी प्रसन्नता मिलती है
जैसे कुत्ते की गर्दन पर
बहुत दिनों बाद मालिक के हाथ फेरने से
कुत्ते को होती है !
(.....और कुत्ता निहाल हो मालिक के तलवे चाटने लगता है !)
मुख्य राजनैतिक द्वारा दलों का वर्षों से यही

दुस्साहस (मतदाता  को कुत्ता समझने का) इस जागृत जन-मानस वाले माहौल में भी
जारी रहा ...
हर बड़े राजनैतिक दल के प्रत्याशियों में बड़ी संख्या में
गंभीर अपराधों के आरोपी सम्मिलित थे   !
कई तो गैर जमानती अपराधों के आरोपी होने कारण
जेल में रहकर ही चुनावी रण का संचालन कर रहे थे  !
आप में से अधिकांश अन्ना-अन्ना करते हुए
"राईट टू रिजेक्ट "
और
"राईट टू रिकाल"
का समर्थन कर रहे थे !
किन्तु जब सामने अवसर था तो
रिजेक्ट की जगह सिलेक्ट कर दिखाया !!!!!!!!!!!!!!
जी हाँ !
"राईट टू रिजेक्ट" शुरु से ही आपके पास रहा है...
उनके विरुद्ध उपयोग करने के लिए
जिनको जरा जरा से प्रलोभनों में पड़कर
पिछली बार भी चुनने की गलती आपने की थी !
और "राईट टू रिकाल"
उनके लिए जो अपनी ताकत
और गुंडों की सेना के दम पर
चुनाव जीतकर आज भी
इस गुमान में हैं कि
उस क्षेत्र में उन्हें कोई हरा ही नहीं सकता !
जो क्षेत्र विशेष की सीट को अपनी जागीर समझे बैठे हैं !

'राईट टू रिजेक्ट ' और 'राईट टू रिकाल ' 
कानून बनने का  ही इन्तजार  क्यों  ???
अभी भी था/है आपके पास...
उपयोग करते/कीजिए !
स्वयं ही परिवर्तन के सूत्रधार बनते/बनिये !
"राईट टू  रिजेक्ट " कानून तब जरूरी होता
जब सीमित राजनैतिक दलों को ही
चुनाव लड़ने की पात्रता होती !
क्या जरूरी है...
कि किसी  'विशिष्ट'  राजनैतिक दल के
प्रत्याशी को ही वोट दिया जाए ?????
क्या कभी कहीं कोई ऐसा चुनाव क्षेत्र भी रहा है...
जहाँ कोई भी  "सभ्य / सुसंस्कृत"  उम्मीदवार
क्षेत्रीय दलों/ निर्दलीयों में भी ना रहा हो ?????

*(निर्दलीय को भी विकास मद में उतनी ही
सांसद / विधायक निधि मिलती है जितनी अन्य दल
के टिकट पर जीतकर आये सदस्य को !)*

जीतने वाली पार्टी का भी आप केवल अनुमान ही लगा
सकते हैं !
हो सकता है आपके दिए वोट से आपके पसंदीदा दल की  सरकार बनी हो
और
यह भी हो सकता है कि वह दल विपक्ष में बैठा हो !!!
फिर क्या जरूरत है...
किसी पारंपरिक राजनैतिक दल के 'आपराधिक' प्रत्याशी को ही मन  मारकर चुनने की ???
फिर भी चुनना है तो चुनो
आगे भी चुनते रहो 
मगर फिर बढ़ते अपराधों
और भ्रष्टाचार की दुहाई मत दो  !!!
क्योंकि
भ्रष्टाचारी, बलात्कारी, हेराफेरी करने वाला, घोटालेबाज, लूटेरा, 
हत्यारा, गुंडा, जैसा अपराधी  छवि / पृष्ठभूमि धारी ,
प्रत्याशी को  चुनकर / सत्ता सौंपकर
आप स्वयं उन्हें, आपके साथ / आपके अपनों के साथ
ऐसे ही अपराध करने
अधिकृत कर रहे होते हैं और आमंत्रित भी !!!!!
आप स्वयं भी तो अपराध ही कर रहे हैं ...
ऐसे भ्रष्टों को आपके अपनों के साथ
भ्रष्टाचरण, बलात्कार, लूट, हेराफेरी जैसे अपराध करने का लायसेंस देकर !!!
जागिये !
संभलिये !!!
कुत्ते मत बनिए !!!!!
सदा सोच समझकर वोट दीजिये !!!!!!!
अपने मताधिकार का

सोच समझकर ही
''सही प्रयोग"
अवश्य कीजिये !!!!!!!!!!
"सही मतदान आपका महत्वपूर्ण कर्तव्य है!
 और सर्वाधिक मूल्यवान अधिकार भी है!!!"
धन्यवाद !!!!!!!!!!!!!!!!!!!
जय हिंद !
जय भारत !!!
वन्दे मातरम्!!!!!

-चर्चित (http://swasaasan.blogspot.in,  http://swasasan.wordpress,com )

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