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बुधवार, 30 दिसंबर 2015

गुरु - एक विचार

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ...
गुरु - एक विचार
"गुरु" वह विचार है जो अनुचित और उचित का अंतर बताता है!
जिस व्यक्ति, पुस्तक या आख्यान से
आपके अब तक के अनुत्तरित प्रश्न का उत्तर मिल सके
या जो अनौखा प्रश्न प्रस्तुत करे
वह ही गुरु है
इससे इतर और कुछ नहीं !
निश्चय ही माता-पिता सबके प्रथम गुरु हैं
फिर अक्षर ज्ञान दाता से लेकर हर वह व्यक्ति
जिसने जब कभी आपके अनुत्तरित प्रश्न का समुचित उत्तर दिया हो
वह गुरु ही तो है!
गुरु यानी ज्ञान का भंडार

मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

काम हम भी आये थे!

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
साँस दर साँस
लम्हा दर लम्हा
दो जिस्म एक जान
की तरह जीते-जीते 
एक दिन अहसास हुआ
भ्रम है यह!
जिस्मों की ही तरह
जानें ही अलग ना थीं
जुदा तेरे ख्वाब भी थे !
 फिर भी हमारी लाचारी 
अपनी उम्र सारी
तेरे ख्वाबों की ताबीर हम तराशा किये!
तेरे हर सुनहरे ख्वाब में,
खुद का पैबंद

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

सम्हलता कहाँ है

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
सुबह तो हो जाये मगर
 वो जागता कहाँ है?
भूल फितरत इंसां की,
 इंसां मानता कहाँ है?
मन में जीवित हो यौवन
तो कभी ढलता कहाँ है ?
यौवन में युवमन सम्हाले
किसी से सम्हलता कहाँ है ?
#सत्यार्चन
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

ऐसे अब जज्बात कहाँ?

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....

जलते शोलों को लिख पायें
शब्दों की औकात कहाँ?
कह डालें अनकहे बोल सब
ऐसे अब जज्बात कहाँ?
बिन बोले कह दें
सुन लें गुन लें
#सत्यार्चन 
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

बुधवार, 16 दिसंबर 2015

इतराया किये उम्रभर ....

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
आशना थे वो अक्स के
ना समझे थे...
हम दर्पण थे ,
बेवजह ही हम,
गिर के टूटे, एक बार
हो चूर-चूर  बिखर गये ....
अब रास्ते की धूल हैं... 
राहगुजर ये उनकी हैं
गुजरते हैं वो हमें छूकर
इतराने का एक और नया
बहाना हमको मिल गया!!!
आशना थे वो अक्स के
ना समझे थे...
हम दर्पण थे ,
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

हक मांगने की जुर्रत...

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
किस्मत में क्या लिखा उसने,
कहकर भी सुना दिया....
मूश्किलों से मत डरना !
हक के लिये, सदा लड़ना!!
जो चाहोगे पा जाओगे!!!!
जिद, जिद की तरह करना!!!!!
हम डरे नहीं ... हम गिरे नहीं ...
पर जिद हो सकी ना कभी हमसे ...
#सत्यार्चन
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

शनिवार, 12 दिसंबर 2015

बर्दाश्त

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
बर्दाश्त
नाकामयाब इश्क का, इक ये भी असर हुआ
दुनियां के बड़े आशिकों में, नाम अपना भी शुमार है!
.
मेरे दर्द से तू गाफिल हो, बर्दाश्त से बाहर था
अच्छा हुआ खतावार मेरे, दर्दीले अहसास ही निकले!
.
मेरे दर्द से बेखबरी तेरी, हो ही नहीं सकती थी
इसीलिए अहसासों को ही, सूली टाँग दिया हमने!
.
मेरी जहीनियत के रास्ते, पीर, तेरे मुकाम तक पहुँचे होंगे 
बेवजह इल्म भला, किसे हासिल हुआ है अब तक! 
.
पहले-पहल का दर्द, हमें भी, बहुत सताया किया
अब दर्द के सितारों से मेरा, दामन रोशन हुआ करता है!
.
इश्क हर किसी को हो, सब आशिकी करें
कामयाब इश्क होगा या कामयाब शख़्सियत!
.
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

वो रब सा हो गया है

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
वो जबसे जुदा हुआ
रब सा हो गया है!
  दीद उसकी नामुमकिन
पर होने की आस तो है!
 साथ उसका होना नामुमकिन...
फिर भी अहसास तो है!
निगाह-ए-करम बहुत मुश्किल
 अनबुझी मगर मेरी प्यास तो है!
 मेरा वजूद है इस ख्याल से कि
वो कहीं आसपास तो है!
‪#‎Sathyarchan‬
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

रविवार, 6 दिसंबर 2015

नजरों में चुभने लगते हैं

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....

जख्म जब फूलों से सज जायें ....
दर्द खुशबू बन बिखेरने लग जायें ....
दर्द जो दिल में आकर बस जायें !!!
-
#सत्यार्चन
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

अपनी अस्मिता को मरते देख ...

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
भारत
अग्रगामी रह विश्व के लिये अनकरणीय रह
गौरवांवित होता रहा है
किन्तु आज,
साहित्य सहित सभी क्षेत्रों में
हम अन्योन्य का केवल अनुकरण कर रहे हैं ....
अपनी अस्मिता को मरते देख दर्द तो होगा ना .....
क्षमा!
- ‪#‎सत्यार्चन‬
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

गमगीनी की लत

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
है सबसे खराब यारो....
चंद बोतलों को तोड़कर,
शराब से तो निजात है.....
पर जिंदगी निचोड़कर भी
गम छोड़ता नहीं.......
- ‪#‎सत्यार्चन‬

..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

दायित्व या कृतघ्नता! क्या उचित है ?

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
भारत की स्वतंत्रता और फिर स्वावलंवन
के संघर्ष में स्वयं को आहूत करने वाले
स्वतंत्रता साकार के दीवानों
के दुर्दांत जीवन और फिर अधिकांश की
अकिंचन सी मृत्यु पर
 हँसी ही आ रही हो तो 
तो फिर से विचार करें कि

गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

दर्पण था तब

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
दर्पण था तब मैं ना समझ था...
वो आशना थे अक्स से
 इतराया किये हम उम्रभर ....
इक बार गिर के टूटा
तो बिखरा चूर हो लिया .... ...
अब रास्ते की धूल हूँ...
औ'
गुजरते हैं, इधऱ से वो
एक बार फिर,
इतराने की
वजह मिली है मुझको!!!
- ‪#‎चर्चित_चित्रांश‬

..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

SwaSaSan: क्या सही और क्या गलत

SwaSaSan: क्या सही और क्या गलत: स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् .... -:  क्या सही और क्या गलत :- हम सभी निर्देशों से संस्कारित होकर समझदार होते हैं! मजेदार बात यह ...

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् .... ..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

क्या सही और क्या गलत

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
हम सभी निर्देशों से संस्कारित होकर समझदार होते हैं!
मजेदार बात यह है कि इनमें से अधिकांश निषेधात्मक निर्देश होते हैं!
जिनमें प्रमुख है 
ऐसे मत '.....' करो
रिक्त स्थान में शब्द वाक्यांश भरते जाइये 
ऐसे मत 'बैठा' करो
ऐसे मत 'चला' करो
ऐसे मत 'बोला' करो
ऐसे मत 'लेटा' करो
ऐसे मत 'सोचा' करो
आदि-इत्यादि....
जब हम स्वयं विवेकवान हो चुके होते हैं

SwaSaSan: बड़े घर के गलियारे से - 1

SwaSaSan: बड़े घर के गलियारे से - 1: स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् .... बड़े घर के गलियारे से - 1 आदरणीया कलैक्टर किंजल सिंह जी: हरि ओम् ! आपके नियंत्रणाधीन जिले के व...

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् .... ..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

बड़े घर के गलियारे से - 1

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
बड़े घर के गलियारे से - 1
आदरणीया कलैक्टर किंजल सिंह जी:
हरि ओम् !
आपके नियंत्रणाधीन जिले के वन विभाग ने, आप पर,  दुधवा सुरक्षित वन में,
वनवासी पशुओं की शांति भंग का आरोप लगाया है!
आपने स्पष्टीकरण भी दिया है किन्तु आपके स्पष्टीकरण से परिलक्षित है कि
आप अपने विभागीय श्रोतों से "उचित उपार्जन" करने में अक्षम रहीं हैं
साथ ही दूसरे विभागों के 'उचितोपार्जन' में भी वाधक बनी हुई हैं!
आपके कार्यकाल में आपके जिले से एवं आप जैसे अर्धसक्षम अन्य कलैक्टरों की अक्षमतावश
 'उचितोपार्जित' रेवेन्यु में नकारात्मक वृद्धि से शासकों को
'शासकोपयुक्त' संसाधनों में कटौती को विवश होना पड़ता है!
आपको सूचित किया जाता है कि आपके विरुद्ध कार्यवाही करने की अनुशंसा करने

मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

Meaningful

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
If words were meaningful
n so stronger 
Sight might remained
speechless ever
If all could told,
what to say
expressions might loosen,
their values to lower!!!
#Sathyarchan
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

सोमवार, 30 नवंबर 2015

तेरा इकलौता खत....

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
तेरा इकलौता खत....
बिना हर्फों का, तेरा इकलौता खत....
है आज भी, मेरी सम्हाली हुई दौलत....
तूझसे भले कुछ भी लिखा ना गया ...
पर हजार बार में भी पूरा पढ़ा ना गया....
तेरा तो इशारों में किया वो इंकार था फकत ..... ...
ताउम्र पढ़ते रहे हम पीछे छुपी हुई वजह ...
हश्र जो होना था, हुआ वही अंजाम ....
हम गुमनाम, तुम बदनाम,
निभाने की कोशिश में रहे चारों ही नाकाम!!! ....
रोते हैं आज साथ-साथ, वे दुश्मन तमाम....
और कब तक होगा जाने,  यह इश्क का अंजाम!!!
- ‪#‎सत्यार्चन‬

..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

रविवार, 29 नवंबर 2015

क्यों आते हैं... बुलाते हैं?

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....

जी चाहा, चले आते हैं, ....
जी चाहे तो बुलवाते हैं....
कितने शिकवे जताते हैं ....
कुछ दर्द सुन जाते हैं....
कुछ हिदायतें दे लेते हैं ...
कुछ ताकीद भी कर जाते हैं ....
सोचने में अक्सर आता ह...
वो क्यों आते हैं .... ..... .... क्यों बुलाते हैं???- ‪#‎सत्यार्चन‬
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

लक्ष्मण-परसुराम संवाद निरंतर....

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ..... 
जाने क्यों आज राम-लक्ष्मण-परसुराम सम्वाद बहुत याद आया!
कैसे भरी सभा में लक्ष्मण की ऊधम से परसुराम झुंझलाते रहते हैं!
और लक्ष्मण ढिठाई से अधिकांश समय उनका मखौल उड़ाते ही रहते हैं!
पटाक्षेप से तनिक पहले राम आकर परसुराम को बहला कर लक्ष्मण की
 बचपने वाली भूल को अनदेखा करने राज़ी भी कर लेते हैं ....
और अपनी जय-जयकार भी करवा लेते हैं!
बस आजकल यही पंचायत से लेकर सं.रा.महासंघ में हो रहा है!...
सभी सभाओं में एकाध राम हैं जो,
 लाखों-लाख लक्ष्मणों से
 करोढ़ों परसुरामों का मखौल भी उड़वाते हैं और
परसुरामों से जय-जयकार भी कराये जा रहे हैं! ‪#‎जय_हो‬!
ना तब नायक राम पर प्रश्न उठाया जा सकता था ना आज!!!
ः- ‪#‎सत्यार्चन‬
..... अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना
 के चन्द शब्द...

शनिवार, 28 नवंबर 2015

दो पहलू

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर...
परवाह नहीं जिन्दगी, तू जो चाहे  लिख जाये....
कांटे चाहे जितने, राह में  तू बिछाती जाये.... 
जीने ना दे जीते जी,  भले चैन का कोई पल.....
मरने से पहले बस इतना रहम फरमाये....
जब मौत आये तो आगोश साझा हों ....
दम उसका निकले औ मेरी साँस थम जाये!!!
- #सत्यार्चन
कौन कितना सराहेगा ,
नकारेगा कौन कितना,
क्यों सोचूँ?
जिन्दगी मिल्कियत मेरी,
जी भर जीना,
 हक मेरा!!...
- ‪#‎सत्यार्चन‬
.... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

सोमवार, 23 नवंबर 2015

मानवता को खतरा बनते "हमारे-अपने"?

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर...

मेरे अपनों के आराध्य और मेरे प्रिय
सभी सामाजिक संगठन, उनके बहुत बड़े हितसाधक हो सकते थे, जिनका ये प्रतिनिधित्व करते हैं!
किन्तु: सभी में कुछ बुराईयां समान रूप से विद्यमान हैं कि
- सभी के मूल में प्रत्यक्ष या परोक्ष राजनैतिक लक्ष्य हैं.
- सभी हिंसक गतिविधियों के पक्षधर हैं, कुछेक के लिए तो बात मनवाने का आयसिस सा तरीका ही सबसे आदर्श है!
- सभी संगठनों के मुखियों को, उनके परिजनों से इतर, बलिदानी कार्यकर्ताओं की दरकार है!
- सभी जुनूनी आग को बुझने नहीं देना चाहते!
- सभी की सौहार्द्र से कट्टर दुश्मनी है!
- सौहार्द्र के संदेशकों का गला काटने सभी तत्पर हैं!
- सभी को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है!
इन जैसे अधिकांश संगठनों का गठन शोषण के विरुद्ध आक्रोश की बारूद के फटने जैसा हुआ था....
 जैसे चम्बल की घाटी में युगों से दबंगी से पीड़ित स्त्री/ पुरुष दस्यु सरदारों की शरण में जाकर
 आगे स्वयं दबंग बन, अन्य वंचकों के शोषक बन बैठना!.....
जैसे नक्सलियों का आंदोलन ध्यानाकर्षण से शुरु होकर समानांतर प्रशासक तक का हिंसक सफर ....
नक्सल और दस्यु समस्या का कुछ सीमा तक नियंत्रण केवल तब संभव हो सका है
जब संयुक्त प्रयास किये गये और इनके संरक्षकों को संरक्षण से वंचित किया गया!
मानवता के शत्रु बन चुके संगठनों को नेस्नाबूद करने शासन को यही करना होगा!
साथ ही, आज के आयसिस के तरीकों के पक्षधर दिखते सामाजिक संगठनों को,
मानवता के दुश्मन बनने से रोकना है, तो उन्हें जताया जाना होगा कि,
मानवता के मित्र, आपको मानवता की सीमा में रहते ही, साथ दे पायेंगे, या कि आपका साथ ले पायेंगे !
अन्यथा मानवता के मित्र अस्त्र-शस्त्र तो नहीं उठायेंगे किन्तु मानवता को नष्ट-भ्रष्ट भी नहीं होने देंगे!
आपसे केवल संबंध विच्छेद कर लेंगे, जैसा कि 31 जनवरी 1948 को, 
 रा. स्व. सं. के अनेक नियमित सदस्यों ने शाखाओं को सदा के लिए त्याग कर किया था!
#सत्यार्चन
...एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

रविवार, 22 नवंबर 2015

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर
कौन जाने,
किस-किस दरिया में,
समंदर सा जोर हो....
पर मौजों सा टकराने वाला,
बताओ, गर दूजा किसी ओर हो!!! ...
-
‪#‎सत्यार्चन‬
... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

Killing on Way of Worship!

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर
How Surprising ...!!!
 n How Foolish are EXTRIMISTS in The World?
They are killing others' for different "Ways of Worships" ONLY!!!!!!!!!
WE ALL KNOW THE ALMIGHTY! or THE SUPREEMO!
which IS ONLY TRUTH !
 IT can't limited in any Name / Shape / Sex !
 IT can't prayed in any uniform way!
 JUST BEHAVING HUMAN IS IT's TRUE WORSHIP !!!
 Anti-Human can't recognized as HIS/HER Path finders!
 This is The Time When Human Has to use All Weapons Against Enemies!!!
 "Inhumanity's  Assassination" is Need Of The Hour !!!
‪#‎Sathyarchan‬
... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

रविवार, 15 नवंबर 2015

https://www.youtube.com/watch?v=XwK2upIvRU0


https://www.youtube.com/watch?v=XwK2upIvRU0
स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

बुधवार, 11 नवंबर 2015

SwaSaSan: -: आओ हम दीप जलायें :-

SwaSaSan: -: आओ हम दीप जलायें :-: स्वागत् है आपका SwaSaSan पर...   -: आओ -: आओ हम दीप जलायें :- . आई है  फिर दीपमालिका  आओ हम दीप जलायें ! अधम पर दिव्य के विजय...

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

-: आओ हम दीप जलायें :-

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर...
 
.
आई है  फिर दीपमालिका 
आओ हम दीप जलायें !
अधम पर दिव्य के विजयोत्सव पर 
सब मिल दीप जलायें !
.
किसी क्षुधित व्याकुल निर्धन के 
भोजन का कुछ प्रबंध करें 
फिर छप्पन व्यंजन भोग से पहले 
आओ हम दीप जलायें !
.
किसी दरिद्र दुखी अधनंगे के 
तन ढंकने का यत्न करें 
फिर नूतन धवल परिधान पहन 
आओ हम दीप जलायें !
.
संतप्त स्वजन परिजन पीड़ा से 
परजन  को भी ध्यान धरें 
फिर कर्णभेदी आतिश के संग 
आओ हम दीप जलायें !
.
.....एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द!

गुरुवार, 5 नवंबर 2015

पराये धर्म के अपने और मेरे अपने धर्म के पराये....?

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

पराये धर्म के अपने और मेरे अपने धर्म के पराये....?


 मेरे अपने तो मेरे दिल में बसा करते हैं
फिर अपनों के अपने दूर कैसे रहते?
मेरे अपनों में परिजन से प्रिय हुए
मेरे - कुल, जाति, धर्म, घर, मोहल्ले, शहर, प्रांत, देश...
और पूरी दुनियां के लोग
मैं विस्तृत हुआ धीरे-धीरे
मैं से 'हम-दोनों' में
फिर 'हम-चार' से 400 में, 4,00,000 में
फिर बढ़ते-बढ़ते
कुछ करोड़ मेरे धर्म के
दुनियां भर में फैले हुए लोगों तक
विस्तृत हुआ मैं
गैरों से अपनों के हक की लड़ाई मेरा मकसद बना
एक बार
मेरे अपनों की सीखों पर
एक गैर से वाद-विवाद हुआ
उसने पूछा कि -
क्या तुम्हारे लोग तुम्हारे अपनों की
सीखों पर ही चलते आये हैं ?
क्या कंस, रावण, हिरणाकुश तुम में से एक ना थे?
क्या रावणों, दुर्योधनों के ज्ञात-अज्ञात कुलवंशज
तुम्हारे बीच नहीं हैं आज ?
या खुद तू जो इतना बलबला रहा है
इनमें से किसी का खून नहीं कैसे कह सकता है?
मैं मौन हो सिर झुकाये सुनता रहा....
मन ही मन गुनता रहा ...
मेरे रावण, कंस, दुर्योधनों से
बहुत ऊपर हैं
महान हैं
वे गैर जिन्हें जाना नहीं अबतक मैंने!!!
अब लगता कल तक
मैं
शायद अखिल ब्रम्हांड में
व्याप्त हो जाउंगा
सबमें स्वयं को
और स्वयं में सबको पाउंगा.....
‪#‎सत्यार्चन‬

बुधवार, 8 जुलाई 2015

मेरे दोस्त.....

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...
मेरे दोस्त.....
जी चाहता है
मिल जाओ तुम
यकायक कहीं मेले में
लिपट जाओ आकर मुझसे
फिर सोचता हूँ...
ना हो ऐसा कभी
जीवन भर....
तेरे-मेरे पवित्र रिश्ते की
समझ कहां है दुनियां वालों में भला!
तुझसे मिलना मेरी चाहत तो है पर
तेरी खुशहाली को आँच आये ना कहीं....
ना आये कभी तू फिरसे 
यही दुआ है मेरी
रब से दिल से!!!
-चर्चित

गुरुवार, 18 जून 2015

तमीज

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...
तमीज
सीखना तो पड़ता है
चाहे
माँ के दुलार से
या
पिता की दुत्कार से
या
गुरु की फटकार से
या
दोस्तों की गालियों की बौछार से
प्रियतम की मनुहार से
 या
बीबी/ बास के तिरस्कार से
या
पुलिस की मार से
या
इन सबके मिले जुले संसार से
मगर
सीखना तो होगा ही
-सत्यार्चन

रविवार, 31 मई 2015

Truer Times



स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

Truer Times



स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

Truer Times



स्वागत् है आपका SwaSaSan पर... एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

मंगलवार, 19 मई 2015

शनिवार, 9 मई 2015

विकास चाहिए या विनाश?


प्रकृति की सर्वोत्तम कृति था इन्सान!
प्रकृति की गोद में पलते हुए धीरे-धीरे विकसित होते-होते
प्रकृति प्रदत्त प्रज्ञान के अभिमान से 
प्रकृति से ही प्रतिद्वंदिता करने लगा!!!
प्रकृति का निर्विवाद सर्व-स्वीकार्य तथ्य है कि-
प्रकृति ने एक साथ स्त्री और पुरुष दोनों को रचा 
इस विचार के साथ कि दोनों मिलकर ही सार्थक हैं, सम्पूर्ण हैं....
पृथक-पृथक निरर्थक!
एक दूसरे के विरुद्ध होकर केवल विनष्ट...
हर विवेकी "व्यक्ति" को अपने-अपने विवेक से विचारना ही चाहिये कि
हमें विकासोन्मुख होना है या विनासोन्मुख!
.                                              -सत्यार्चन

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