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शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

एक प्रयास,"बेटियां बचाने का": सबसे प्यारी -- "जान" है तू

एक प्रयास,"बेटियां बचाने का": सबसे प्यारी -- "जान" है तू: सबसे प्यारी -- " जान " है तू ----------------------------------- (photo with thanks from google/net,indianhindu names) हे ! ...

SwaSaSan Welcomes You...

सोमवार, 9 दिसंबर 2013

चर्चित सुख के साधन

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर...
........

(पुनः प्रकाशित)

मेरा ही नहीं, श्रीमद्भागवद्गीता, पाक कुरान ,द ग्रेट बाइबल , गुरु ग्रन्थ साहिब आदि धर्म ग्रंथों सहित

कई अन्य विद्वानों का सन्देश है

जिसे मैंने मेरे जीवन में उतारकर 

जीवन सरल व सुखी बनाने में सफलता पाई है ...

----

सारे रिश्तों, नातों, मित्रों आदि के प्रति

कुछ भी करते समय

एक भाव जन्मता है कि मैं इसके हित साधन में सहायक हूँ

फिर अगले ही पल एक आस जगती है कि

इसे लगना चाहिए ,

इसे मानना चाहिए कि  

ऐसा मैं कर रहा / रही हूँ

मेरी आवश्यकता पर

इसे भी ऐसा ही करना चाहिए ....

आदि.... आदि....

यही वे प्रतिफल की इच्छाएं हैं जो 

दुःख / कष्ट का कारण हैं .

हम किसी के भी प्रति

{स्वयं अपने प्रति भी }

कुछ भी करते हुए

यदि यह भाव रखें कि 

मैं ऐसा इसीलिये कर रहा/ रही  हूँ  कि

मुझे ऐसा करने की ईश्वरीय प्रेरणा मिली है

या मेरे विवेक अनुसार इस समय

ऐसा ही किया जाना उचित है

मैं केवल सद्भाव से

अपना कर्त्तव्य कर रहा /रही हूँ

जरुरी नहीं कि इसका

सबसे अच्छा /अच्छा

ही परिणाम आये

हो सकता है

इससे भी अच्छा कुछ हो सकता था

हो सकता है

इसका परिणाम अच्छे के स्थान पर बुरा हो 

 किन्तु

मेरे विवेक अनुसार

मैंने अच्छे के लिए ही ऐसा किया

यदि इससे  बुरा भी हो

तो

मुझे आहत नहीं होना है

अच्छा हो

तो

इस बात के लिए

घमंड ना कर 

 आनंदित होना है

कि

मुझे ऐसा अच्छा कार्य करने का

ईश्वर ने अवसर दिया

जिसके प्रति मैंने किया

उसके लिए तो ऐसा होना ही था

यदि मैं ना करता / करती

तो भी

उसके साथ ऐसा होना 

{अच्छा /बुरा }

पूर्वनिर्धारित था .

बस

यही निष्काम कर्म है

यही है

नेकी कर दरिया में डाल

जब इस तरह का भाव

जागृत होना संभव हो जाता है

तब कुछ नए अनुभव होते हैं

केवल सुख के अनुभव

थोडा और विचार कीजिये 

आप उनके लिए दुखी हो लेते हैं

जिनके लिए आपने बहुत कुछ किया 

लेकिन वो आपके लिए

बहुत कुछ / कुछ भी नहीं कर पाए

.

अब एक और बात सोचिये

उन लोगों के बिषय में सोचिये

जिन्होंने आपके लिए

बहुत कुछ/ कुछ  भी अच्छा किया

शायद तुरंत बहुत कम लोग याद आयें

किन्तु

थोडा जोर डालने पर

थोड़े बहुत लोग याद आ ही जायेंगे

[ये तुरंत याद इसीलिये नहीं  आ पाते 

क्योंकि यह हमारा सामान्य

मानव स्वाभाव है.

हम हमारे प्रति किसी के कुछ किये को

अधिक किया नहीं मानते .

यही उनके साथ भी होता है

जिनके लिए हमने कुछ किया,

जो हमारे लिए महान लगता है 

लेकिन उसकी नजरों में

उतना महत्वपूर्ण नहीं होता ]

जो लोग आपके ही अनुसार आपके लिए

कुछ हित संवर्धन का कारण बने

उनमें से कितनों के लिए

प्रतिफल में आप कुछ कर पाए .

कई ऐसे लोग आपकी लिस्ट में मिल जायेंगे

जिनके लिए अच्छे के प्रतिफल में

आप उतना / कुछ भी

  अच्छा नहीं कर पाए होंगे / होंगी.

यहाँ तक कि कईयों को तो

आप कृतज्ञता तक

प्रकट नहीं कर पाए होंगे /होंगी .

यही तथ्य उस समय भी

ध्यान में रखना  चाहिए जब

हम दूसरी ओर हों .

जिस तरह आप उनके लिए

कुछ खास नहीं कर पाए

जिन्होंने आपके लिए किया

उसी तरह वो भी

आपके लिए नहीं कर पाये होंगे!

जिनके लिए आपने कुछ खास किया !

किन्तु यह "अच्छा " होना निरंतर जारी है .

जरुरी नहीं प्रतिफल में

वह व्यक्ति ही कुछ करे

जिसके लिए आपने कुछ किया. 

"प्रतिफल में कहीं कोई और

आपके लिए शुभ कर रहा होगा"

जैसे

अनचाही बरसात में  जब आप

हाथ में छतरी लेकर चलते हैं

तब बरसात से आपको

पूरी छतरी मिलकर ही बचाती है

जबकि आपके सीधे सम्पर्क में

छतरी की केवल डंडी होती है.

आपका पूरा ध्यान पूरी पकड़ डंडी पर ही होती है

बरसात से बचाने वाले परदे की ओर

आप देख भी नहीं रहे होते हैं!

ऐसे ही जीवन यात्रा है

जिसमें दुःख / दर्द की बारिस हो रही है....

और आपके हाथ में

आपके " संचित " *** सद्कर्मों की छतरी है.

कभी यह बरसात सुहानी लगती है

कभी साधारण

कभी मुसलाधार बारिस के साथ

आँधी भी चल रही होती है

तब हमारे हांथों में पकड़ी हुई

मजबूत से मजबूत छतरी भी

हमें भीगने से बचा नहीं पाती

यह बरसात

कभी कम होती है तो कभी ज्यादह

कभी क्षणिक तो कभी लम्बे समय के लिए ....

.......यही प्रकृति है.



*** संचित कर्मों से मेरा आशय आपके होश सँभालने से लेकर

अभी तक के आपके कार्यों

के अतिरिक्त

आपके पूर्वजन्मों के {यदि पूर्व जन्म में विश्वास हो },

पूर्वजों के (क्योंकि जन्म से स्वावलम्बन् तक

आप पूर्वजों के अर्जित का ही उपभोग कर रहे होते हैं!),

 कुल के / परिजनों (परिजन का अर्थ अलग-अलग शरीरों में

एक ही व्यक्ति के होने सा है/होना चाहिये! ) के कर्मों का निष्कर्ष है .

 अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

-'चर्चित चित्रांश'
 

रविवार, 24 नवंबर 2013

SwaSaSan: एक खुली चिट्ठी अन्ना जी, किरण जी के नाम....

SwaSaSan: एक खुली चिट्ठी अन्ना जी, किरण जी के नाम....: स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द... एक खुली चिट्ठी अन्ना जी , किरण जी के नाम....   ... स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

एक खुली चिट्ठी अन्ना जी, किरण जी के नाम....

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...


 

 

आदरणीय अन्नाजी,

सादर प्रणाम!

 सार्वजनिक मंच पर खुला पत्र लिखने हेतु अग्रिम क्षमा प्रार्थना!

(वैसे भी आपके और आपको प्रेषित पत्र आगे जाकर सार्वजनिक होते हैं)

अरविंद जी से आपकी नाराजी क्या वास्तव में केवल हिसाब किताब की ही है?

 यदि हाँ और आपके पास कोई ठोस प्रमाण हों तो

कृपया शीघ्रातिशीघ्र सार्वजनिक करवाइयेगा ताकि

हमारी भोली-भाली जनता अरविंद जी के बहकावे में आकर

अपना अहित ना करा बैठे

अन्यथा कम से कम इस समय,

जब उनको उनकी सम्पूर्ण ऊर्जा की आवश्यकता दूसरे मोर्चे पर है!

ऐसे समय में कट्टर दुश्मन के अतिरिक्त और किसी से भी

नया विवाद उठाना नैतिकता के विरुद्ध है!

(और शायद भाई अरविंद अब तक तो आपके दुश्मन नहीं ही हैं....)

किन्तु अन्नाजी ऐसा लगता नहीं

कि आपकी मूल नाराजगी हिसाब संबंधी है....

वरन् आपकी राजनीति से दूरी की विचारधारा के

के पालन ना कर पाने और अपने पूर्व सहयोगियों से ना करा पाने

के कारण आप अधिक नाराज लगते हैं?

आप और किरणजी दोनों राजनीति को अस्पृश्य मानते हैं!!!

आपमें इस भावना के बलवान होने का कारण भी समझ आता है

कि

आपका समर्पण महात्मा गाँधी एवम् उनके हत्यारों की

दोनों ही संस्थाओं से रहा है;

दोनों  राजनीति से तथाकथित दूर!

किन्तु दोनों ही मुख्य एवम् कुशल (नेपथ्य) संचालक !

दोनों ही उच्च आदर्शों के वाहक

दोनों का ही निषेध राजनीतिक पद से

पद से होने हो सकने वाले लाभ से!

उनके लिए राजनीति दूषित हो त्याज्य नहीं

वरन् उपभोग बिना दोष निवारण योग्य!

यही महात्मा गाँधी एवम् ऱा. स्व. सन्. दोनों के प्रयास!!!

यही आचार्य चाणक्य का भी उद्देश्य था!

यदि राजनीति स्वतः निकृष्ट होती

तो इतिहास के सभी राजनीतिज्ञ निकृष्टतम ही माने जाते!!!

हम आज

इंद्र, राम, कृष्ण, भीष्म, गौतम, महावीर, नानक, गोविंद आदि

को आदर्श मान ना पूज रहे होते!!!

रही बात अरविंद जी की सक्रिय राजनीति में उतरने की

तो

अन्नाजी; किरणजी आपके अतिरिक्त भी

समस्त राजनीति परित्यक्त जनों से भी

सादर प्रश्न है कि

भारतीय राजनीतिक सरोवर की देखभाल

के अब तक के ठेकेदारों में से प्रत्येक ने

ठेका लेते समय जिन शर्तों के वादों पर हस्ताक्षर किए,

उनके पालन से सरोकार ही ना रखा...

हर ठेकेदार केवल स्वयम् की अगली पीढ़ियों तक के लिये जोड़ने की

हेराफेरी में लगा रहा....

65 साल बीत चुके हैं आजमाते हुये...

और कितने ठेकेदारों को आजमायें???

शायद अब वह समय आ पहुँचा है जब

यदि

हम उन पूर्व राजनीतिक ठेकेदारों से

नीति कुशल नहीं भी हैं तो भी

हमारे पास

उस पवित्र सरोवर की देखरेख के

अधिकार पाने की गला काट प्रतिस्पर्धा में

स्वयं को  और स्वजनों को

झोंकने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं!

यह जानते हुए कि आज

यह प्रतिस्पर्धा समर का रूप ले चुकी है....

इसमें उतरकर हम

आहत भी हो सकते हैं और हत् भी,

लांछित भी और लांछन सिद्ध भी,

आरोपी भी और अपराधी प्रमाणित भी!!!

इस सामरिक प्रतिस्पर्धा में

कभी राम का तो कभी कृष्ण का

कभी चाणक्य का कभी गौतम का

कभी गाँधी का कभी भगत सिंह का

मार्ग अनुसरण करना ही होगा!

परिणाम की चिंता किये बिना!

-चर्चित चित्रांश-


शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

SwaSaSan: -:- सुनो> गुनो> चुनो> बुनो> बनो -:-

SwaSaSan: -:- सुनो> गुनो> चुनो> बुनो> बनो -:-: स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...  -:- सुनो~> गुनो~> चुनो~> बुनो~> बढ़ो~>बन... स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

बुधवार, 20 नवंबर 2013

-:- सुनो> गुनो> चुनो> बुनो> बनो -:-

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...


-:- सुनो~> गुनो~> चुनो~> बुनो~> बढ़ो~>बनो -:-

सफलतम् व्यक्तियों ने भी
 अपने जीवन का कुछ ना कुछ भाग
व्यर्थ के कामों अवश्य गंवाया होता है....
(आपने... बस उनसे थोड़ा सा अधिक....)
फिर भी वे सफलतम में गिने गये!
विश्वास रखिये
आप उनसे भिन्न नहीं हैं!
सफल होना
सफलता के नये नये शिखरों को चूमना
इस पर निर्भर करेगा कि
आप कब जागे
जागने का एक तरीका यह भी है कि
आपको जगाने के लिये
आती हुई हर आवाज को सुना जाये
ध्यान से सुना जाये
जो सुना गया है
उसपर पूरे मन से
पूर्ण निष्पक्षता से
विचारा जाये
गुना जाये
गुनकर उपयुक्त अनुपयुक्त
का निर्धारण कर
उपयुक्त को चुना जाये
जो चुना है
उसपर चलने से पहले
बिभिन्न विकल्पों को विचारा जाये
श्रेष्ठतम विकल्प को योजनाबद्ध किया जाये
बुना जाये
फिर सधे हुये कदमों से
सफलता के पथ पर
बढ़ जाया जाये
बन जायें जो चाहें....
बहत आसान है
बस सुनने की आदत डालनी होगी
छोटी बड़ी आवाजों को.....



रविवार, 27 अक्तूबर 2013

चर्चित तीर-6

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर....

 
6.
नरेन्द्र मोदी एवं रा. स्व. संघ दोनों ही का
राष्ट्रवादिता श्रेष्ठतम गुण है.....
एकमात्र एवं निकृष्टतम अवगुण
विरोधी विचारधारा के उठते स्वर का परिहार
स्वर के श्रोत को ही मिटाकर कर देना .…
चुनावों के मौसम में मोदीजी भी  ….
 कांग्रेसियों का अनुसरण करते दिख रहे हैं ?
यथा कांग्रेसियों को केवल तीन पूर्व प्रधानमन्त्री ही उल्लेखनीय लगते हैं ….
मोदीजी को बस एक …
कांग्रेसियों को केवल
कांग्रेस शासित प्रदेश
अग्रणी दिखते हैं
मोदीजी को
केवल (भाजपा शासित में से भी) गुजरात ?
.
यदि लम्बे समय तक
लगातार शासन कर पाना ही विशेषता है
तो केंद्र के लिए कौन अधिक योग्य ???
.
 'स्व-सा-सन' अनुसार
विभिन्न उत्कृष्टता मानदंडो पर मापने पर
अब तक के सर्वश्रेष्ठ
भारतीय प्रधान-मंत्री क्रमशः
१-
राजीव गाँधी
(सर्व प्रथम राजनेता जिसने ८५% तक के भ्रष्टाचार
को स्वीकारने का साहस दिखाया ,
दूर करने के उपायों के रूप में
कम्प्यूटरीकरण की जिद्दी शुरुआत की,
आधार कार्ड की आधारशिला रखी,
 सर्वदलीय सहमती की विचारधारा की शुरुआत की )
२- लालबहादुर शास्त्री
(बहुत छोटा सा कार्यकाल किन्तु देश को
खाद्यान्न आत्मनिर्भरता की ठोस अवधारणा का सूत्रपात किया )
३- इंदिरा गाँधी
(दो निर्भीक महत्वपूर्ण कदम
बांग्लादेश का  निर्माण ,
पाक प्रोत्साहित सुलगते पंजाब में आतंकवाद का दमन,)
(-बड़ी भूल  आंतरिक आपातकाल -)
४- अटल बिहारी बाजपेयी
(उचित समय पर ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क मार्ग उपलब्ध कराने प्रधानमंत्री सड़क  योजना,
शिक्षा को आन्दोलन के रूप में उभरने के प्रयास )
५- मनमोहन सिंह
(आम आदमी के हित में सर्वाधिक बड़े और कड़े फैसले लेने में साहसिक सफलता
.क- डायरेक्ट ट्रान्सफर स्कीम की शुरुआत,
ख. - दुनियाँ भर में आयी आर्थिक मंदी से
देश को न्यूनतम प्रभावित होने देने में सफल
ग.- घरेलु गैस पर सब्सिडी सीमित करने का कदम,
घ.- खाद्यान्न सुरक्षा योजना )
च.- भूअधिग्रहण अधिनियम   .
वर्तमान मुख्य मंत्रियों
  में-
१- शिवराज सिंह
(प्रदेश कि विकास दर - 04 से शुरु कर 10 के ऊपर तक पहुचाने मे
विवाद रहित प्रशासन के साथ् सफल !
कारण रहे लोक सेवा गारंटी जैसे विषिष्ट कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण,
भ्रष्टाचारी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही कि त्वरित अनुमति,
साम्प्रदायिक भेदभाव रहित शासन
किसी पूर्व शासक द्वारा प्रारम्भ की योजना को बन्द नहीं किया गया,
विपक्षी केन्द्र शासन की जनहित कारी योजनाओं को परहेज रहित लागू किया जाना आदि ! )
२- नीतिश  कुमार
(गुण्डाराज के लिए विश्व प्रसिद्ध बिहार को विकास के लिए प्रसिद्ध बनाने में सफल)
३- नरेन्द्र मोदी
(गुजरात की प्रसिद्धि भी सारे विश्व में पिछले 100 बर्षो से अधिक से है!
इसीलिए गुजरात का थोडा और विकास ऊपर  लिखे प्रदेशों की तुलना में  कम किन्तु महत्व्पूर्ण .
नवोन्मेशी योज्नाओं यथा नहरों के खुले हिस्से पर
सोलार पेनल लग्वाने जैसी योजना का लागू करवाना आदि. )
४- शीला दीक्षित
(सारे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाबजूद दिल्ली महानगर को
दुनियाँ से विश्व-स्तरीय मनवाने योग्य बनाने मे सफल!
अभी अभी मीडिया द्वारा दिल्ली चुनावों के मद्देनजर कराए सर्वे में
तमाम आरोपों के बाबजूद  सर्वप्रथम )
5.- विजय बहुगुना
(चुनाव जीतकर आते ही महाविनाश से सफल्ता पूर्वक सामना )
-----------
.... अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

रविवार, 13 अक्तूबर 2013

पूर्वाभाश

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर
14 मार्च 2015 को ट्वीटर पर ट्वीट कर अभी आये भूकम्प की चेतावनी जारी की गई

पूर्वाभाश 


दोस्तो ; 
यदि आप सन्मार्ग के राही हैं तो
ईश्वर आपको कुछ ना कुछ विशेष से अवश्य आशीषित करता है.
जैसे कि मेरे लिए आशीषित है कि
मुझे भविष्य मैं होने वाली सामाजिक घटनाओं का पूर्वाभाश रहता है.
कुछ आत्मिक संकेत मुझे भविष्य मैं होने जा रही घटनाओं कि जानकारी देते रहते हैं.
एक दो बार लोकल मीडिया को सूचित करने का असफल प्रयास भी किया
और अपने परिचय क्षेत्र में मौखिक सुचना भी दी
साथ ही हमारी कानून व्यवस्था से भय भी रहता है
किन्तु अब में जो भी आभाष होते हैं उन्हें जनहित मैं
सार्वजानिक जरुर करना चाहूँगा .
पूर्वघोषित सन्देश
१ . १९९४ मैं भोपाल, म प्र के परिचितों को बताया कि -
कोई ऐसी महामारी जो दुनियाँ से जा चुकी मान ली गई है
जैसे हैजा , प्लेग या  चेचक  फिर से आने वाली है
और बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाली है.
( प्लेग आई और और नुकसान पंहुचाया)
२. हैती , चीन , पाकिस्तान , इंडोनेशिया ,  
के भूकंप आने के २-३ दिन पहले लोकल प्रिंट मीडिया को
इ-मेल सन्देश प्रेषित चीन के भूकंप की तीव्रता ६.८ बताई जो ७ रही .
३. मुंबई हमलों के बाद आतंकवादियों के भारत मैं घुसने की सुचना के बाद
उ प्र स्थित मित्रों को पहला हमला वनारस मैं
शिवरात्रि उत्सव जैसे भीड़ वाले समय मैं
होने की सुचना मार्च से मई २००९ के बीच एस एम् एस द्वारा दी . 
(धन्यवाद् दोस्तों का जो उस एस एम् एस को भूल गए
अन्यथा शायद पुलिस मुझे परेशान कर रही होती)

कुछ पूर्वाभाश
१. प्रधान मंत्री के रूप मैं श्री मन मोहन सिंह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पायेंगे .
यदि ऐसा होता है तो भी राहुल गाँधी अगले पी एम् नहीं होंगे
कोई बिलकुल चोंकाने वाला नाम नया पी एम् होगा .
२. वाराणसी हमलों का सुराग मुंबई के स्थान पर दिल्ली  से मिलेगा .
उपरोक्त केवल पूर्वाभाश हैं इनके सच होने का में कोई दावा नहीं करता .

अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...

बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

स्वसासन सोशल मीडिया अवार्ड्स-1

स्वागत् है SwaSaSan पर



१.- Rs. २१०००/-, २.-  Rs. ११०००/-, ३.-५१००/-  + १०००/- क़े ११ तथा ५०१/- के २१ 
दोस्तो;
२ अक्टूबर गांधी / शास्त्री जयंती पर घोषित
के विषय मै आपने पढा,
स्वसासन इन अवार्ड्स को देने प्रतिबद्ध है !
यह आप पर निर्भर है कि
आप स्वसासन को होने वाले लाभहानि के लेखे जोखे में ,
 विश्वास अविश्वास  पर विचार करने  में,
समय खर्चें अथवा
सकारात्मकता को समर्थन में .......
प्रस्तुत है  विस्तृत
नियम एवं शर्ते
१.-केवल सकारात्मक अभिव्याक्तीयो वाली सर्वश्रेष्ठ तीन प्रोफ़ाइल को
ही सम्मिलित किया जायेगा (सकारात्मकता आलोचना का अधिकार नहीं छीनती
वरन सशक्त, संयत, समालोचना का विकल्प प्रस्तुत करती है)
२.- यदि समस्या या विसंगती को इंगित करना उद्देश्य हो
तो उन्मूलक तार्किक उपाय भी  सुझाये जाने चाहिये .
३.- किसी भी तरह कि अश्लीलता युक्त प्रस्तुतीकरण अस्वीकार्य
(यौन बिषयो  पर स्वस्थ चर्चा अश्लीलता नहीं )
४.- केवल स्वयं द्वारा आवेदित प्रोफ़ाइल पर ही विचार संभव है संपूर्ण सोशल मीडीया पर नहीं !
५.- 'स्वसासन' ब्लोग लिंक
 को फालो / सब्स्क्राइब कर रखना आवश्यक है !
 http://swasaasan.blogspot.com;
http://swasasan.in;
http://swasasan.com ,
एवं SwaSaSan के अन्य सकारात्मक पेजेज का 
फालो / सब्स्क्राइब अपेक्षित है !
(ताकि सकारात्मकता को सम्बल मिल सके )
१.- https://www.facebook.com/AapIndia.MeIndia#
२.- https://www.facebook.com/groups/changetuchange/
३.- https://www.facebook.com/pages/Kahte-HAIN-KI-HAI-CharchiT-KAA-Andaaj-e-Bayaan-Aur/181767648621844
४.- https://www.facebook.com/groups/charchit/
५.- https://www.facebook.com/Swatantrata.Saakaar.Sangh
६.- https://www.facebook.com/pages/%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80/229465957180735
७.- https://www.facebook.com/groups/nodowryclub/
८- https://www.facebook.com/groups/SwaSaSan/
९.- https://www.facebook.com/NekiKarDariyaMeDaal
१०.- https://www.facebook.com/notes/
११.- https://www.facebook.com/groups/janjanjagran/
६.- इस घोषणा का लिंक, काँपी/शेयर कर,
अपने प्रोफ़ाइल पेज पर प्रमुखता से प्रदर्शन अपेक्षित है !
(करने के लिए इस पोस्ट के नीचे शेयर विकल्प मे से आपकी प्रोफाइल से सम्बन्धित विकल्प (Facebook, G+1,  blogger, Twitter etc.)का चुनाव कर  अपने विचारों सहित शेयर करें )
(ताकि सकारात्मकता को आपाका समर्थन सिद्ध हो सके एवं मिल सके )
=======
किसी भी तरह के परिवर्तन का अधिकार SwaSaSan को रहेगा !
प्रत्येक रविवार को इसी साइट पर सम्बन्धित सूचानाएं प्रदर्शित की जायेंगी ! 
नोट-  गूगल ट्रांस्लेशन की मदद से लिखा गया है
भाष़ायी अशुद्धीयोँ हेतु क्षमा कीजिये!
http://swasaasan.blogspot.com/2013/10/blog-post.html
अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...
'चर्चित'
http://www.swasaasan.blogspot.com 
पिछली २ अकटूबर को प्रदर्शित पन्क्तियां .....
सोशल मीडिया का महत्व दैनंदिन बढता ही जा रहा है... दुरूपयोग भी ;
'स्वसासन' दुरूपयोग को हतोत्साहित
और सद को प्रोत्साहित करने के उद्देष्य को 
अपना नैतिक कर्तव्य मानता है !
इसीलिये आज के पुनीत दिवस 
जब 'महात्मा गांधी' और शस्त्री जी दोनो की जयंती है !
 पह्ले पहल भारतीय सोशल मीडिया अवार्ड घोषित कर 
दोनो महान बिभुतियो को श्रद्धांजली अर्पित करता है ! 
   दोनो हि विभूतिया सकारात्मकता कि समर्थक रही है 
इसीलिये सकारात्मकता को समर्पित इस अवार्ड कि घोषणा
हेतू आज सर्वोचित अवसर है !
ये पुरुष्कार ३० अगस्त २०१४ को घोषित,  एवं २ अक्तूबर २०१४ को वितरीत किये जायेंगे!
 प्रथम आवश्यक शर्त है हिंदी(अन्ग्रेजी, उर्दू आदी से  संक्रमित हिंदी भी स्वीकार) में,
 भारत मे प्रचलित किसी भी सोशल मीडिया(यथा ब्लागर, फेसबुक, आदि) पर प्रोफ़ाइल,
केवळ सकारात्मक अभिव्याक्तीयो वाली सर्वश्रेष्ठ तीन प्रोफ़ाइल को 
क्रमशः
प्रथम
रू २१०००/-  (रुपये इक्कॆस हजार मात्र ) 
द्वतीय
 रु ११०००/- (रुपये ग्यारह हजार मात्र)
तृतीय 
रु ५१००/-(रुपये पांच हजार एक सौ मात्र)
 (प्रेषण बैंक ड्राफ्ट अथवा खाते में  अंतरण द्वारा) 

रविवार, 29 सितंबर 2013

The Best!

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर.... 
.
The Best we know
actually is
The Best Until Now Only.
As in ancient time
the best source of light at nights
was Moon Light,
Then some 'devil human'
invented fire....
and burning objects became The Best...
Then invented Electric current by Steaphen Fleming and a diode bulb,
by Tomas Alwa Edision which replaced open burning lamps....
but diode bulbs, carbon arc lamps, Tube Lights etc.
been replaced by Chlorine/ Sodium Vapour lamps
and now CFLs rocking, ...
THESE CFL WILL ALSO BE REPLACED IN FUTURE...
....'The Devil Human' will never deactivated....         
......अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द..

रविवार, 22 सितंबर 2013

मैं, तुम, आज और कल

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना के चन्द शब्द...



मेरी आज की मुफलिसी 
को दिल्लगी ना बना 
कल वक़्त की दिल्लगी कहीं
तेरी मुफलिसी  ना हो.… 
आज फर्श पे मैं हूँ
तो तू भी तो है यहीं !
 जब फ़र्श के नीचे पहुचुँगा
शुमार अर्श पे किया जाऊँगा
चाहेगा तो होना  तू भी वहीँ
चल  मेरे साथ चल
वरना यहीं के यहीं
.
-चर्चित
http://swasasan.in
http://swasasan.com
 
 

 http://swasaasan.blogspot.com/2013/09/blog-post.html

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

Earthquake Alarming 8-Charchit Predictions-24

SwaSaSan Welcomes You...
पिछले 10 मार्च, 07 अप्रेल और 22 अप्रेल को
चेतावनी पोस्ट की गई थीं (क्लिक कर जाँचिये ...)
http://swasaasan.blogspot.com/2013/04/charchit-predictions-23.html
जिनमें उत्तरी भारत में भूकंप की  आशंका व्यक्त की गई थी ....
जम्मू काश्मीर क्षेत्र में (केंद्र हिंद्कुश में )
5.8  तीव्रता का, इरान केन्द्रित दिल्ली तक के
और 24 अप्रेल के अफगान, पाक केन्द्रित  विस्तृत  भूकंप आने पर
ये  आशंकाएं सत्य प्रमाणित हुईं !
भारतीय क्षेत्र में भूकंप के सम्बन्ध में
कुल 7 भविष्यवाणियाँ इस साईट पर की गईं
जिनमें से सभी (आंशिक या पूर्ण)
सटीक  भविष्यवाणियाँ सिद्ध हुईं !
.
( 10  मार्च २013 की लिंक  Prediction By Charchit-21 )

(22 अप्रेल लिंक
http://swasaasan.blogspot.com/2013/04/charchit-predictions-23.html)
भारत में अगले भूकंप से बड़े नुक्सान की आशंका है!
उत्तरपूर्व से मध्य भारत होकर दक्षिण पश्चिम तक प्रभावित् होने की संभावना है !
जिसकी तीव्रता मध्यम, 4 से 7  के बीच,  रहना संभावित है!

'स्वसासन' का उद्देश्य डराने का कतई नहीं है किन्तु आगाह करने का कर्त्तव्य निर्वाह मात्र है !
पिछले अनुमानों के सत्य निकलने के आधार पर
यह पूर्वानुमान सार्वजनिक कर रहा हूँ
और
भयभीत होने के स्थान पर सावधान रहने की प्रार्थना भी !
अगले 3 -21   दिनों के अन्दर
भारत के आंशिक मध्य  (पश्चिमी  मध्य भारत ) भूभाग सहित 4 से अधिक तीब्रता वाले
भूकंप के आगमन की
अथवा
 से भारत के इस भूभाग के
वातावरण के प्रभावित होने की संभावना है !
सावधानी अपेक्षित !
वैधानिक चेतावनी -
'स्वसासन' का यह सूचना जारी करने का उद्देश्य मात्र 'जन-मंगल' है !
यह केवल एक अनुमान है सत्य निकलने की कोई निश्चितता नहीं!
इसीलिये मात्र सावधान रहने की प्रार्थना है!
इस सूचना के पढ़ने/सुनने/या जानने / से किसी को भी किसी भी प्रकार की क्षति
का उत्तरदायित्व 'स्वसासन' का नहीं होगा!

रविवार, 14 अप्रैल 2013

PHILOSOPHY ON LOVE

SwaSaSan Welcomes You.  
प्रचलित मायनों में प्रेम का अर्थ स्त्री-पुरुष प्रेम संबंध है!
कुछ हद तक ठीक भी है ....
क्योंकि प्रेम का सर्वाधिक महत्वपूर्ण रिश्ता भी यही है!
इस विषय पर ढेरों किताबें लिखी जा चुकी हैं 
फिर भी कुछ ना कुछ कहने योग्य सदैव शेष है ;
चर्चित प्रेम दर्शनानुसार 
1.
जब तक दोनों केवल एक दूसरे से मिलने/ को देखने 
में खुशियाँ 
खोजते रहते हैं ....
प्रेम अंकुरण की स्थिति में होता है !
2.
जब दोनों केवल एक दुसरे की 
खुशी में ही सुख पाने लगते हैं .....
प्रेम पल्लवित हो चुका होता है!
3.
फिर जब प्रेम पादप को सीधे खड़े रहने
या लता की तरह बढ़ने के लिए,
यानी खुश रहने के लिए
एक-दूजे के अतिरिक्त 
थिएटर / पिज्जा हट/  पिकनिक /जल-बिहार/ बनाव श्रृंगार/ उपहार/
टी व्ही/फ्रिज/ए सी जैसे विभिन्न उप-साधनों की भी 
आवश्यकता पड़ने लगती है .....
तब प्रेम प्रौढ़ हो चुका होता है!
4.
जब एक दूजे और इन उप-साधनों के अतिरिक्त
बारम्बार तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से
खुशी मिलने लगती है ...
तब इस प्रेम-बिटप में पतझड़ 
का प्रारम्भ हो चुका होता है!
(इसके बाद प्रेम-बिटप के पुनर्पल्लवन/पुनर्जीवन हेतु 
विशेष प्रयास की आवश्यकता होती है   !) 
5.
जब प्रेमान्कुरण से पतझड़ के बीच के किसी भी समय में
दोनों में से कोई एक या दोनों ही
किसी तीसरे में  
खुशियाँ तलाशने लगते हैं ...
तब प्रेम-बिटप मृत्यु शैय्या पर लेटा हुआ होता है!
जिसमें पुनर्जीवन की संभावनाएं अशेष सी होती हैं 
और किसी भी पल प्रेम-पादप 
बाहरी सुनामी का शिकार हो
दुखद मृत्यु  को प्राप्त हो सकता है !!!
http://swasaasan.blogspot.com/2013/04/philosophy-on-lave.htmlhttp://swasaasan.blogspot.com/2013/04/philosophy-on-lave.htmlhttp://swasaasan.blogspot.com/2013/04/philosophy-on-love.html

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