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रविवार, 24 अप्रैल 2011

चर्चित ब्लॉगर मदद मंच { हिंदी }

स्वसासन आपकी प्रतिक्रियाओं के स्वागत को प्रतीक्षित है....


JAAGO MRUT BHARTEEYA JAAGO !!!!

चर्चित ब्लॉगर मदद मंच { हिंदी }

आप और मैं, हम सभी हिंदी प्रेमी भी हैं और हिंदी लेखक भी,
जाज जैसे ब्लॉगर मंच भी उपलब्ध हैं !
फिर किसे इंकार होगा कि
अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम साधन है – ब्लोगिंग !
कुछ समस्याएं जरुर आड़े आती है हिंदी के लेखकों को
जैसे अधिकांश का अंग्रेजी भाषा ज्ञान सीमित होना ,
तकनीकी ज्ञान / कौशल की कमी .
उपरोक्त दो समस्याएं अच्छे भले लेखक और पाठक दोनों की परेशानी का कारन बनती हैं ,
किन्तु हमारे ही कुछ ब्लॉगर भाई – बहिन पूर्ण दक्ष भी हैं !


इन्हीं कि मदद से समाधान के उद्देश्य से आज
‘ ब्लॉगर मदद मंच { हिंदी } ‘
आप सभी ब्लॉग लेखकों को समर्पित कर रहा हूँ !
वे जिन्हें समस्या है प्रतिक्रिया के रूप में लिखें !
साथ ही

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

अन्नाजी; जय हिंद !!!

 आश्चर्य है अन्नाजी सरकार की एक और चाल में फंसकर खुश हो रहे हैं !
वह भी केजरीवाल जी और किरणजी जैसे सहयोगियों के होते हुए !
विगत ४ अप्रैल को भी अन्नाजी के अनशन समापन वाले दिन मैंने नीचे प्रदर्शित लेख लिखा था जो अक्षरसः सामने आ रहा है उसी तरह आज फिर लिख रहा हूँ ! अन्नाजी खुश होने लायक सरकार कुछ नहीं करने जा रही है वरन मेरे पिछले लेख के अनुसार ही सरकार की अगली चाल है यह जिसपर आप वेवजह प्रसन्न हो रहे हैं !
सरकार ने सभी राजनैतिक दलों और राज्यों के मुख्मंत्रियों की बिल पर रायशुमारी की मंशा एक सोची समझी साजिश के तहत जाहिर की है !
भारतीय राजनैतिक इतिहास गवाह है ना किसी भी विपक्ष ने कभी  सात्ताधारी दल के [ सरकारी ] और ना ही सरकार ने विपक्ष के [गैरसरकारी ] किसी भी उपयोगी से उपयोगी बिल को, बिना अनावश्यक बहस या बिना मनमाने गैरजरूरी संशोधनों का  दबाव बनाए, कभी पारित करवाने में रूचि दिखाई तो आज इतने महत्वपूर्ण बिल जिसपर कई राजनीतिज्ञों का भविष्य ही दांव पर लगने वाला हो को ऐसे ही छोड़ देंगे !
पिछले ४२ सालों से भी इन्हीं राजनैतिक दलों के झूठे / सच्चे विरोध / संशोधन प्रस्तावों के चलते लोकपाल बिल अटका रहा है तो अभी भी कम से कम ७-८ साल अटकाने का प्रबंध तो सरकार ने कर ही लिया है !
और भी मजे की बात यह कि मुद्दे को उठाने वाले अग्रणी नेता अन्नाजी की ख़ुशी ख़ुशी हामी भी भरवा ली !
अन्नाजी काश मुझे भी आपके सलाहकार मंडल में शामिल किया होता !
मैं आप जैसा नामी गिरामी नेता तो नहीं किन्तु विगत २१ सालों से भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्यरत हूँ ,और  एक एक दुह राजनैतिक चाल को बारीकी से देखते देखते अगले २१ सालों की इनकी रणनीती आज ही देख पाने में सक्षम हो गया हूँ ! 

[ विगत ४ अप्रैल ११ को नीचे दी गई लिंक प्रस्तुत की थी ] 
यह जीत नहीं भुलावा  है -अन्ना जी ,केजरीवालजी,किरण जी !
अन्नाजी के अनशन और केजरीवाल जी ,किरण जी के प्रयासों से सरकार झुकी हुई प्रतीत हो रही है किन्तु यह पूरी तरह सच नहीं है .
यदि माननीय मनमोहन जी जैसे नेताओं के हाथ में होता तो लोकपाल बिल ४२ वर्षों तक इन्तजार ना कर रहा होता .
कांग्रेस में ही नहीं देश के राजनैतिक इतिहास में मनमोहन जी , अटल जी , राजीव जी ,आडवानी जी जैसे नेता गिने चुने ही हुए हैं. सब के सब सत्ता के भागीदारों से सहयोग के बदले उनके अनैतिक की अनदेखी करने विवश!

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

एक तल्ख़ कहानी -आ अब लौट चलें.....

स्वसासन आपकी प्रतिक्रियाओं के स्वागत को प्रतीक्षित है ....

वह दिखने मैं ठीकठाक ही था
लेकिन यह उसकी अपनी सोच थी
सच यह था की जितना वह दिखने में आकर्षक था
उससे कई गुना व्यवहार में
हुनर मंद इतना की किसी भी मॉडल की कार की इमरजेंसी सर्विस में पूरे शहर में प्रसिद्द
शहर के नंबर एक वर्कशाप का हैड मैकेनिक
उसके आकर्षक व्यक्तित्व से मालिक से अधिक उसकी पूछ परख थी
फिर चाहे कार मालिक महिला हो या पुरुष
सबका चहेता था वो दोस्ताना था सबसे उसका
एक दिन उसकी एक महिला दोस्त ने उसे

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

लघु कथा-१ सपनों का घर

स्वसासन आपकी प्रतिक्रियाओं के स्वागत को प्रतीक्षित है ....
सपनों का घर

एक सामाज सेवी संस्था के बुलाबे पर दिल्ली जा रहा था.

शाम के ५ बज रहे थे .
शयनयान श्रेणी के डिब्बे में सहयात्री अपने आप में खोये शून्य से बैठे थे .
मेरे सामने खिड़की से लगकर उनींदी सी एक बृद्धा बैठी थी और
मेरे बाजु में खिड़की पर उसके बृद्ध पति किसी पत्रिका के पन्ने पलट रहे थे.
अचानक बृद्ध ने पत्रिका को बंद कर बगल में रख एक लम्बी सांस खीची और
चश्मा उतारकर साफ़ किया फिरसे पहना और खिड़की के बाहर झाँकने लगे .
थोड़ी देर बाद खिड़की के बाहर सूखे खेतों की तरफ देखते हुए बृद्ध ने उत्साह पूर्वक
बृद्धा की और देखकर लगभग चिल्लाने वाले अंदाज में कहा

"देखो वो वहां जो मकान दिख रहा है ना ....."

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