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रविवार, 29 नवंबर 2015

लक्ष्मण-परसुराम संवाद निरंतर....

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ..... 
जाने क्यों आज राम-लक्ष्मण-परसुराम सम्वाद बहुत याद आया!
कैसे भरी सभा में लक्ष्मण की ऊधम से परसुराम झुंझलाते रहते हैं!
और लक्ष्मण ढिठाई से अधिकांश समय उनका मखौल उड़ाते ही रहते हैं!
पटाक्षेप से तनिक पहले राम आकर परसुराम को बहला कर लक्ष्मण की
 बचपने वाली भूल को अनदेखा करने राज़ी भी कर लेते हैं ....
और अपनी जय-जयकार भी करवा लेते हैं!
बस आजकल यही पंचायत से लेकर सं.रा.महासंघ में हो रहा है!...
सभी सभाओं में एकाध राम हैं जो,
 लाखों-लाख लक्ष्मणों से
 करोढ़ों परसुरामों का मखौल भी उड़वाते हैं और
परसुरामों से जय-जयकार भी कराये जा रहे हैं! ‪#‎जय_हो‬!
ना तब नायक राम पर प्रश्न उठाया जा सकता था ना आज!!!
ः- ‪#‎सत्यार्चन‬
..... अपेक्षित हैं समालोचना/आलोचना
 के चन्द शब्द...
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