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रविवार, 6 दिसंबर 2015

नजरों में चुभने लगते हैं

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....

जख्म जब फूलों से सज जायें ....
दर्द खुशबू बन बिखेरने लग जायें ....
दर्द जो दिल में आकर बस जायें !!!
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#सत्यार्चन
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

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