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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

सम्हलता कहाँ है

स्वागत् है आपका SwaSaSan पर एवम् ....
सुबह तो हो जाये मगर
 वो जागता कहाँ है?
भूल फितरत इंसां की,
 इंसां मानता कहाँ है?
मन में जीवित हो यौवन
तो कभी ढलता कहाँ है ?
यौवन में युवमन सम्हाले
किसी से सम्हलता कहाँ है ?
#सत्यार्चन
..... अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द...

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