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शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

मकान और घर

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कूलर ए सी का आनंद लेते हुए

भूल चुके हैं हम

कमरे की खिड़की से आती

वो मीठी बयार

ठीक ही कह रहे हैं दिग्विजय जी !!!

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पूजनीय बाबा रामदेव से राजा दिग्विजय सिंह ने कहा है कि
"वे {बाबा रामदेव } सरकार को जांच करने का चेलेंज ना करें ,वे सरकार को जानते नहीं "
दिग्गी राजा के इस कथन से मैं पूरी तरह सहमत हूँ .
हमारे भारत देश का आज़ादी से लेकर आज तक का इतिहास गवाह है कि
जिस तरह सरकार में सम्मिलित सदस्य {मंत्री ,सांसद आदि } के विरुद्ध होने वाली
बड़ी से बड़ी जांच संस्था उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती उसी तरह निर्दोष होते हुए भी

अभागा शिल्पकार

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अभागा शिल्पकार

मैं

एक शिल्पकार

वर्षों से कर रहा हूँ

सिलाओं पर शिल्पकारी

कहते हैं लोग

केक्टस उग आया है

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केक्टस उग आया है
हम दोनों
हमारा छोटा सा घर
घर के आँगन में बगिया
बगिया में खिलते फूल
हमें प्यार था
फूलों से
फूलों की खुशबू से
फूलों की मुस्कान से

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

उनके लबों पर

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गिरफ्तार-ए-मोहब्बत होकर चाहा कैद रहना उम्रभर
रहे कैद लेकिन तरस गए उनकी नजर को उम्रभर

सोचा किये उनके लबों पर हक़ मेरा है बस मेरा
हक़ जताते ही रहे हक़ पा ना सके उम्रभर 



समझा के हारे दिल को ना आयेंगे वो अब कभी
नादान दिल ये दीवाना किया इन्जार उम्रभर

उनका आना ख्वाब में है एक हकीकत लेकिन
हकीकत में आना उनका एक ख्वाब रहा उम्रभर
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रविवार, 30 जनवरी 2011

एक चिट्ठी राहुल गाँधी के नाम

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राहुलजी धन्यवाद् ! .... भ्रष्टाचार पर बोलने के लिए ! 
आप और आपके पिता स्व. श्री राजीव जी भ्रष्टाचार को स्वीकारने वाले पहले राजनेता हैं . बड़े साहस की बात है . स्व राजीव जी ने स्वीकारा था कि केंद्रीय योजना के  एक रुपये में से ८५ पैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है . आज भी स्थिति सुधरने के स्थान पर बदतर हुई है . प्रश्न यह है कि उक्त सार्वजानिक कथन को कहे दशक बीत चुका है यानी बीमारी का पता लगे तो सालों हो गए किन्तु अभी भी इलाज शुरू करने का विचार ही किया जा रहा है . यदि प्रथम बिंदु से चलने वाला १ रु  दसबें बिंदु तक १५ पैसे बचता है तो निश्चय ही १ले  से २रे या २रे से ३रे
बिंदु पर भी भ्रष्टाचार हो रहा है . क्या इतनी मोटी सी बात  उपरी स्तर पर दिखाई नहीं देती . इस सम्बन्ध में

बुधवार, 26 जनवरी 2011

नहीं है इन्तेहाँ ?

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कानून व्यवस्था की दुर्दशा की इन्तेहाँ यदि मालेगांव की घटना भी नहीं है तो तो जाने कहाँ जाकर होगी. एक एडिशनल कलेक्टर तक को अपनी ड्यूटी     निभाने की कोशिश की सजा उसे जिन्दा जलाकर देने का साहस रखते हैं हमारे देश में फल फूल रहे असामाजिक तत्व फिर आम आदमी की बिसात ही क्या ? मेरी छट पटाहट कुछ ऐसी है जैसे श्री सोनवाने के साथ साथ मुझ पर भी पेट्रोल उड़ेलकर आग लगाई गई हो !

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

पूर्वाभाश


पूर्वाभाश 

अभी अभी दिल्ली में मिले छोटे बम केवल ध्यान भटकने की कार्यवाही है 
अगला आतंकवादी हमला दक्षिण भारत में होने की संभावना दिख रही है .
 अन्ना जी के अनशन समाप्ति के दिन मैंने लिखा था 'यह जीत नहीं भुलाबा है ...'
 [ कल स्वयं अन्नाजी ने स्वीकार किया ]
05/06/2011

सोमवार, 10 जनवरी 2011

भ्रष्ट / ठग कौन नहीं who is not corrupt ?

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 भ्रष्ट / ठग  कौन नहीं who is not corrupt ? 
भ्रष्टाचार पर भाषण देना लगभग हर किसी को पसंद है . किन्तु भ्रष्टाचार की जड़ खुद हम ही हैं .
कैसे ????
कल मध्यप्रदेश के अधिकांश अखवारों में एक कृषि विस्तार अधिकारी, गुप्ताजी, को किसी बिहारी युवक द्वारा ठगे जाने की खबर प्रमुखता से छपी. बिहारी युवक ने अधिकारी की पुत्री को मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने के नाम पर ७ लाख रुपये लिए किन्तु पुत्री के पी एम् टी में पास ना होने पर अधिकारी महोदय को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी.
धन्य हैं हमारी प्रशाशनिक व्यवस्थाएं ! गुप्ताजी की शिकायत सुनी भी गई और प्रिंट मीडिया ने श्री गुप्ताजी की

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

दौलतमंद ? दब्बू दबंग या दिलवाले

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तथा कथित ' दबंग ' क्या वास्तव में  दबंग शब्द के योग्य  हैं ?
{आनर किलिंग के सन्दर्भ में दबंगों की करतूत उनकी कायरता की परिचायक है .ये इतने डरपोक होते हैं की इनमें ऐसे लेख पढ़ने तक का साहस नहीं होता .यदि आप भी उनमें से एक हैं तो आइये थोडा साहस जुटाएं और  चर्चा करें  कौन कहाँ गलत है  ?  मेरे नजरिये को पढ़कर आप भी सुधार पर सोचे  बिना नहीं रह सकेंगे  . यह वादा है मेरा, आपसे . बस पूरा लेख पढ़िये और सुधार  को  मौका दीजिए .}
विगत दिनों हुए और लगातार होते जा रहे 'आनर किलिंग ' के प्रकरणों
 को पढ़कर मेरे अपने आसपास घटित कुछ घटनाएँ याद आती हैं 
जिनमें किसी एक की नहीं जाने कितने संबंधितों की हत्या एक साथ कर दी जाती है जैसे-
                                                
मेरे पड़ौस में ३-४ मकान छोड़कर एक प्रतिष्ठित ,शिक्षित, प्रगतिवादी और उदार परिवार
खान साहब का भी रहता है . खान साहब के छोटे से सीमित परिवार में दो बेटे थे .उनका बड़ा बेटा जब महानगर में कॉलेज में पढ़ रहा था तभी उसे एक भली लड़की से प्रेम हो गया. चूँकि लड़की

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