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शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

केक्टस उग आया है

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केक्टस उग आया है
हम दोनों
हमारा छोटा सा घर
घर के आँगन में बगिया
बगिया में खिलते फूल
हमें प्यार था
फूलों से
फूलों की खुशबू से
फूलों की मुस्कान से


जान छिड़कते थे हम
हमारी बगिया पर
हमारी शान थी बगिया

हमारी जान थी बगिया
मगर ना जाने कब -कैसे
एक केक्टस उग आया
हमारी बगिया में
शुरू में वह
खटकता रहा हम दोनों को
फिर धीरे धीरे
हमारा अप्रतिरोध/ प्रोत्साहन पाकर
केक्टस बढता रहा
क्यारी के एक कोने से
पूरी क्यारी में
फिर पूरी बगिया में
अब
ना तो फूल हैं
ना खुशबू
ना ही मुस्कान
बस
मैं हूँ
वह है
मेरा / उसका घर है
और बगिया है
जिसमें
केक्टस उग आया है

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